वह मिद्यान देश पहुँचा, जहाँ उसकी मुलाकात जेथ्रो नामक एक याजक से हुई। उसने जेथ्रो की बेटी सिप्पोरा से शादी कर ली और एक साधारण गड़रिए के रूप में रहने लगा। एक दिन वह अपनी भेड़-बकरियों को होरेब पर्वत पर ले गया। अचानक उसने देखा—एक झाड़ी आग से जल रही थी, लेकिन वह जलती नहीं थी। तभी आकाशवाणी हुई:
और इस तरह, एक गुलाम बच्चा, एक राजकुमार, एक गड़रिया, आखिरकार इतिहास का सबसे बड़ा नेता और व्यवस्थादाता बन गया। उसकी कहानी आज भी हर उस व्यक्ति को प्रेरणा देती है जो अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना चाहता है। the ten commandments movie in hindi
तब शुरू हुआ विनाश का दौर। मूसा ने अपनी लाठी उठाई—नील नदी का पानी लहू बन गया। मेंढक, जूँ, अंधकार, बालों वाली मक्खियाँ, पशुओं की मृत्यु और फोड़े—एक के बाद एक नौ विपत्तियाँ आईं। पर हर बार रामसेस का दिल पत्थर जैसा कठोर हो जाता। जब दसवीं विपत्ति आई—"प्रथमजात की मृत्यु"—तो उस रात मिस्र के हर घर में, फिरौन के महल से लेकर जेल तक, पहले बेटे की मौत हो गई। इब्रानियों ने अपने दरवाज़ों पर मेम्ने के लहू से चिह्न बना रखा था, इसलिए वे बच गए। वह मिद्यान देश पहुँचा
इस डर से फिरौन ने आदेश दिया कि सभी नवजात इब्रानी बालकों को नील नदी में डुबो दिया जाए। एक इब्रानी माँ ने अपने बच्चे को बचाने के लिए उसे एक पत्थर के पिटारे में सजाकर नदी में बहा दिया। नदी की लहरें उस पिटारे को फिरौन की बहन, राजकुमारी बिथिया के महल के किनारे ले आईं। बिथिया ने बच्चे को देखा और उस पर दया आ गई। उसने उसे गोद ले लिया और नाम रखा—। एक गुलाम बच्चा
मूसा बड़ा होकर एक शक्तिशाली राजकुमार बना। वह मिस्र की सेना का सेनापति था, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि वह असल में इब्रानी है। एक दिन उसने देखा कि एक मिस्री सिपाही एक बूढ़े इब्रानी गुलाम को पीट रहा है। मूसा का खून खौल उठा। उसने उस सिपाही को मार डाला। जब इस बात की खबर फिरौन (अब रामसेस द्वितीय) तक पहुँची, तो उसने मूसा को मौत की सजा सुना दी। मूसा को रेगिस्तान भागना पड़ा।
रामसेस ने अपने ही बेटे को खोया। रातों-रात उसने आदेश दिया: "जाओ! यहाँ से चले जाओ!"
मूसा डर गया। वह बोला, "मैं क्या हूँ? मैं तो हकला जाता हूँ।" परमेश्वर ने उसके भाई हारून को उसका सहायक बनाया और उसे चमत्कारों की शक्ति दी। मूसा मिस्र लौट आया।