निर्देशक कोराली फार्गेट (जिन्होंने Revenge बनाई थी) ने इस बार सिनेमा की हर सीमा तोड़ दी है। क्रोमैटिक कलर्स, क्लोज-अप शॉट्स, और वो साउंड डिजाइन – सब कुछ आपको बेचैन करने के लिए डिजाइन किया गया है।

हॉलीवुड में एक नाम था – एलिजाबेथ स्पार्कल (डेमी मूर)। ग्लैमर, पैसे, फैंस, सब कुछ। लेकिन हॉलीवुड की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि यहाँ उम्र से ज्यादा स्क्रीन पर चेहरा चलता है। 50 की उम्र में एलिजाबेथ को उसके ही शो से निकाल दिया जाता है। अब वो बस एक बूढ़ी एक्ट्रेस है, जिसे लोग 'कल की बात' समझते हैं।

एलिजाबेथ का यंगर अवतार 'सू' (मार्गरेट क्वाली) आता है। जवान, सेक्सी, तड़कती-भड़कती। प्रोड्यूसर पागल हो जाते हैं। ऑफर्स की बारिश। लेकिन यहाँ असली ट्विस्ट आता है – सू को भी लगता है कि वो ज्यादा टाइम ले सकती है। आखिर, पुराने बॉडी की जरूरत ही क्या?

एक इंजेक्शन, और आपकी जिंदगी बदल जाती है। दवा काम करती है, लेकिन शर्त है – तुम अंदर 'बेहतर वर्जन' जगाओगे, और हर 7 दिन में शिफ्ट करोगे। एक हफ्ता तुम, एक हफ्ता तुम्हारा यंगर, परफेक्ट अवतार। बस एक नियम – ।

तभी उसके हाथ एक रहस्यमय दवा लगती है – ।

⭐⭐⭐⭐ (4/5) “तुम्हारा शरीर तुम्हारा असली सब्स्टेंस है। लेकिन क्या तुम उसे कबूल करने को तैयार हो?” नोट: यह फिल्म कन्न्स फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट स्क्रीनप्ले अवॉर्ड जीत चुकी है। हिंदी डब या सबटाइटल के साथ इसे देखना एक ट्रिपी और दहला देने वाला एक्सपीरियंस होगा।

The Substance सिर्फ एक हॉरर फिल्म नहीं है। ये उस दौर का सबसे साहसी साइकोलॉजिकल बॉडी हॉरर है, जो पर करारा तंज कसती है। डेमी मूर ने अपने करियर का सबसे दर्द भरा और बेबाक परफॉर्मेंस दिया है। फिल्म के आखिरी 20 मिनट इतने वाइल्ड और गोर हैं कि हॉरर फैंस थ्रिल हो जाएंगे।

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